आजादी के 68 साल भी ये भारत देश का दुर्भाग्य ही माना जाएगा कि यहां पर लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने नफे नुकसान के हिसाब से कम्युनलिज्म की परिभाषा गढ़ चुके हैं ... 1993 के मुबंई सीरियल ब्यालास्ट के आरोपी याकूब मेनन की फांसी के मुद्दे को लेकर जिस तरह धार्मिक सहानुभूति का चोला पहना कर लोग अपनी सियासत चमका रहे हैं ... ये निंदनीय है क्योंकि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता इसलिए आतंकी चाहे वो किसी मजहब या फिर जाति का हो उसे किसी और चश्मे से नहीं देखना चाहिए ... शत्रुघ्न सिन्हा, राम जेठमलानी, प्रकाश करात और नसीरुद्दीन शाह जैसे कई बॉलिवुड से जुड़े लोगों ने राष्ट्रपति के पास एक अपील की चिट्ठी भेजी है ... जिसमें याकूब की फांसी की सजा को माफ करने की बात लिखी है वैसे भी जन भावनाओं से जुड़ा ये संवेदनशील मुद्दा सोशल मीडिया के चलते देश भर में वायरल है .... जो देशहित में तो कतई नहीं दिखाई पड़ता ... कभी मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह ने भी याकूब के मामले पर भी अपनी राय दी उससे उनकी प्रासंगिकता पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं ... सलमान खान को भी देश भर में उनके भारी विरोध के बाद ट्वीट वापस लेना प़ड़ा ... ऐसे में आज क्या सुप्रीम कोर्ट से याकूब को कोई राहत मिल पाएगी ये देखना बड़ा दिलचस्प होगा....
शेष आगे ........